James Webb Space Telescope ने खोजा अनोखा एक्सोप्लैनेट, विशाल बुध ग्रह जैसी दिखी दुनिया

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James Webb Space Telescope ने खोजा अनोखा एक्सोप्लैनेट, विशाल बुध ग्रह जैसी दिखी दुनिया

नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने पहली बार एक दूरस्थ एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल और उसकी सतह का प्रत्यक्ष अवलोकन किया हैजिससे एक बेहद गर्म सुपर-अर्थ का पता चला है जो पृथ्वी की तुलना में बुध या चंद्रमा जैसा अधिक दिखता है। यह एक्सोप्लैनेट LHS 4844b है जो पृथ्वी से लगभग 30% बड़ा एक चट्टानी ग्रह है। यह एक ठंडे लाल बौने तारे की परिक्रमा लगभग 11 घंटे में पूरी करता है। यह तारे की सतह से मात्र तीन तारकीय व्यास ऊपर परिक्रमा करता हैजो लगभग 0.006 AU हैया बुध से सूर्य की दूरी का एक-चालीसवां हिस्सा है। यह मात्र 48.5 प्रकाश वर्ष दूर हैलेकिन हमारी पृथ्वी से इसकी समानता यहीं समाप्त हो जाती है।

अत्यधिक निकटता के कारण ग्रह ज्वारीय रूप से स्थिर हो गया हैजिसका अर्थ है कि एक ही गोलार्ध हमेशा तारे की ओर रहता है। इसका मतलब है कि ग्रह का एक भाग स्थायी रूप से दिन के समय वाला होता हैजिसका औसत तापमान 725 डिग्री सेल्सियस (1,340 डिग्री फारेनहाइट) होता है। उस तरफ कभी रात नहीं होती।

मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी की निदेशक और इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता लौरा क्रेडबर्ग ने कहा, यह एक बेहद निर्जीव जगह है। जेडब्ल्यूएसटी की अद्भुत संवेदनशीलता के कारणहम इस दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह से सीधे आने वाले प्रकाश का पता लगा सकते हैं। हमें एक अँधेरीगर्मबंजर चट्टान दिखाई देती हैजिस पर कोई वायुमंडल नहीं है।

जेडब्ल्यूएसटी के मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (एमआईआरआई) का उपयोग करते हुएशोधकर्ताओं ने ग्रह के झुलसे हुए दिन के हिस्से से सीधे उत्सर्जित होने वाली ऊष्मा को मापा। इन प्रेक्षणों के निष्कर्ष मई, 2026 को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुए ।

अवरक्त स्पेक्ट्रम बेसाल्ट या ओलिविन-समृद्ध चट्टान से बनी एक गहरे रंग कीकम सिलिका वाली सतह से सबसे अच्छी तरह मेल खाता है - वही पदार्थ जो बुध और चंद्र मारिया को ढकता है।

इससे प्लेट विवर्तनिकी और तरल जल द्वारा निर्मित पृथ्वी जैसीसिलिका-समृद्ध भूपर्पटी की संभावना समाप्त हो जाती है। टीम ने लिखा,स्पेक्ट्रम केवल बेसाल्ट या ओलिविन-समृद्ध पदार्थ की एक गहरे रंग कीकम सिलिका वाली सतह से ही सबसे अच्छी तरह मेल खाता हैजिससे पृथ्वी जैसी सिलिका-समृद्ध भूपर्पटी की संभावना समाप्त हो जाती है।

वायुमंडल की सुरक्षा के अभाव मेंएलएचएस 3844 बी पर तारकीय विकिरण और सूक्ष्म उल्कापिंडों की लगातार बौछार होती रहती है। इस निरंतर संपर्क के कारण चट्टानें महीन रेगोलिथ में टूट जाती हैं और अंतरिक्ष अपक्षय के माध्यम से सतह काली पड़ जाती है।

शोधकर्ताओं ने बतायाज्वालामुखी गैसों जैसे CO2 या SO2 का पता नहीं चला। यदि ज्वालामुखी गतिविधि मौजूद हैतो यह घना वायुमंडल नहीं बना रही है।

खगोलविद एलएचएस 3844 बी की सीधी तस्वीर नहीं ले सके। इसके बजायउन्होंने देखा कि ग्रह की परिक्रमा के दौरान तारे और ग्रह के संयुक्त प्रकाश में कैसे परिवर्तन होता है।

जब तारे का गर्म दिन वाला भाग पृथ्वी की ओर होता हैतो यह तारे की चमक में थोड़ी सी अवरक्त रोशनी जोड़ता है। जब तारे का ठंडा रात वाला भाग हमारी ओर होता हैतो वह अतिरिक्त रोशनी गायब हो जाती है। टीम ने विभिन्न तरंग दैर्ध्यों पर चमक की तुलना करके एक तापीय उत्सर्जन स्पेक्ट्रम बनाया।

 

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