इतिहास के पन्नों में 16 अक्टूबर : जब बंगाल विभाजन के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब


देश 15 October 2026
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इतिहास के पन्नों में 16 अक्टूबर : जब बंगाल विभाजन के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 16 अक्टूबर का दिन ब्रिटिश शासन की विभाजनकारी नीति के खिलाफ उठे व्यापक जनविरोध की याद दिलाता है। वर्ष 1905 में इसी दिन बंगाल का विभाजन लागू हुआ था। ब्रिटिश सरकार के इस फैसले के विरोध में बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए और राष्ट्रवादी आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।

तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन की सरकार ने बंगाल के विभाजन का फैसला लिया था। ब्रिटिश प्रशासन ने इसे बेहतर शासन व्यवस्था के लिए जरूरी बताया, लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे राजनीतिक रूप से देश की एकता को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा। इस फैसले ने लोगों में व्यापक असंतोष पैदा किया।

16 अक्टूबर को विभाजन लागू होने के दिन विरोध प्रदर्शनों, जुलूसों और सभाओं के जरिए जनता ने अपना आक्रोश जाहिर किया। ‘वंदे मातरम्’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। विद्यार्थियों, शिक्षकों, कारोबारियों और आम नागरिकों ने आंदोलन में भाग लिया। स्कूल-कॉलेजों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक विरोध की लहर दिखाई दी।

इस आंदोलन का सबसे प्रभावशाली पक्ष स्वदेशी और बहिष्कार अभियान था। लोगों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। विदेशी कपड़ों की होली जलाने और देश में निर्मित वस्तुओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियों ने आंदोलन को व्यापक जनाधार दिया। इससे स्वतंत्रता संघर्ष में आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता के विचारों को भी बल मिला।

बंगाल विभाजन के खिलाफ उठे विरोध ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ाया। आखिरकार 1911 में विभाजन रद्द करने की घोषणा की गई। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने और स्वतंत्रता संग्राम को जनांदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1788 - मराठों ने शाह आलम को दिल्ली की गद्दी पर बिठाया।

1868 - डेनमार्क ने निकोबार द्वीप समूह के अधिकार ब्रिटेन को बेचे और इसके साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप से उसका आखिरी निशान भी मिट गया।

1905 - लार्ड कर्जन द्वारा बंगाल का प्रथम विभाजन।

1934 - चीन के कम्युनिस्टों ने दस हजार किलोमीटर की यात्रा शुरू की, जिससे कम्युनिस्ट क्रांति का आधार दक्षिण-पूर्व चीन से बदलकर उत्तर पश्चिम चीन हो गया और माओ त्से तुंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अविवादित नेता के रूप में उभरे।

1939 - द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने ब्रिटिश क्षेत्र पर पहला हमला किया।

1942 - बंगाल में आए प्रलयंकारी तूफान में 40 हजार लोगों की मौत।

1951 - पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की रावलपिंडी में गोली मारकर हत्या की गई।

1959 - राष्ट्रीय महिला शिक्षा परिषद की स्थापना।

1964 - चीन ने अपना पहला परमाणु विस्फोट किया।

1968 - हरगोविंद खुराना को चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

1978 - भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने पाकिस्तान में फैसलाबाद टेस्ट से अपने क्रिकेट जीवन की शुरुआत की ।

1984 - दक्षिण अफ्रीका के सामाजिक कार्यकर्ता डेसमंड टुटु को शांति के लिये नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

1996 - ग्वाटेमाला की राजधानी ग्वाटेमाला सिटी में फुटबाॅल मैच के दौरान स्टेडियम में क्षमता से अधिक लोगों के पहुंचने के कारण मची भगदड़ में 84 लोगों की मौत,180 से अधिक घायल।

1999 - सं.रा. अमेरिका ने सैन्य शासन के विरोध में पाकिस्तान पर प्रतिबन्ध लगाया।

2002 - 14वें एशियाई खेलों में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक विजेता डोपिंट टेस्ट में असफल रहने के बाद भारत की सुनीता रानी का पदक छीना गया।

2003 - मलयाली फ़िल्मकार अडूर गोपाकृष्णन को फ़्रांस का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'कमांडर आफ़ द आर्डर आफ़ आर्ट्स एंड लैटर्स' मिला।

2004 - दारफुर में मरने वालों का आंकड़ा 70,000 तक पहुँचा। अमेरिका ने इराकी अबू मुसार जल जरकावी के संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित किया।

2005 - जी-20 देश वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ में सुधार हेतु एकमत।

2011- भारतीय मूल के धावक 100 वर्षीय फ़ौजा सिंह ने सबसे अधिक उम्र में टोरंटो वाटरफ्रंट मैराथन पूरा करके नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। उम्र का ‘शतक’ बना चुके फ़ौजा सिंह ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच आठ घंटे से अधिक समय में फिनिश लाइन पार की।

2012 - सौर मंडल के बाहर एक नये ग्रह ‘अल्फा सेंचुरी बीबी’ का पता चला।

2013 - दक्षिण पूर्वी एशियाई देश लाओस के पाक्से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से कुछ देर पहले लाओ एयरलाइंस के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 49 लोगों की मौत।

जन्म

1896 - सेठ गोविन्द दास - सेनानी, सांसद तथा हिन्दी के साहित्यकार थे।

1905- विनय मोहन शर्मा (पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी) - प्रसिद्ध लेखक एवं आलोचक

1939 - दिगम्बर हांसदा - संथाली भाषा के विद्वान शिक्षाविद और पद्मश्री से सम्मानित थे।

1940 - नरेंद्र चंचल - भारत के प्रसिद्ध गायकों में से एक थे।

1944 - लच्छू महाराज - भारत के जानेमाने तबला वादक।

1948 - हेमा मालिनी - प्रसिद्ध अभिनेत्री और भरतनाट्यम् की नृत्यांगना।

1948 - नवीन पटनायक - ओडिशा के 14वें मुख्यमंत्री।

1950 - निदुमोलु सुमति - भारत की प्रसिद्ध मृदंग वादक हैं।

1995 - अमित पंघाल - कॉमनवेल्थ गेम्स, 2022 में स्वर्ण जीतने वाले भारतीय मुक्केबाज़ हैं।

1995 - वेद कृष्णमूर्ति - भारतीय महिला क्रिकेटर।

2000 - संकेत महादेव - भारतीय भारोत्तोलक (वेटलिफ़्टर) खिलाड़ी हैं।

निधन

1938 - प्रभाशंकर पाटनी - गुजरात के प्रमुख सार्वजनिक कार्यकर्त्ता थे।

1951 - लियाक़त अली ख़ाँ - पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री।

1983 - हरीश चंद्र महरोत्रा - भारत के महान भौतिक वैज्ञानिक और गणितज्ञ थे।

1994 - गणेश घोष - भारतीय स्वतंत्रता सेनानी।

2020 - प्रदीप घोष - कविताएं पढ़ने की अपनी खास शैली के लिए मशहूर बंगाली प्रस्तोता।

महत्वपूर्ण अवसर

- राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह)

- विश्व खाद्य दिवस

- विश्व एनेस्थीसिया दिवस

- कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

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