नेपाल : संसदीय सुनवाई में सरकार को झटका, दो प्रस्तावित राजदूतों के नाम सर्वसम्मति से खारिज


विदेश 15 October 2026
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नेपाल : संसदीय सुनवाई में सरकार को झटका, दो प्रस्तावित राजदूतों के नाम सर्वसम्मति से खारिज

काठमांडू, 15 अक्टूबर   नेपाल सरकार की ओर से सिफारिश किए गए दो प्रस्तावित राजदूत संसदीय सुनवाई की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। संसदीय सुनवाई समिति की बुधवार को हुई बैठक में सऊदी अरब के लिए प्रस्तावित गिरिबहादुर सुनार और मलेशिया के लिए चूडामणि खरेल के नाम सर्वसम्मति से खारिज कर दिए गए।

सुनार के खिलाफ महिला हिंसा और खरेल के खिलाफ आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामलों के कारण उनके नामों को अस्वीकार किया गया। वहीं, जापान के लिए प्रस्तावित राजदूत ज्ञान कुमार थापा के मामले में अतिरिक्त विवरण मिलने के बाद ही फैसला लेने का निर्णय किया गया। फिलहाल, उनके नाम पर निर्णय रोक दिया गया है।

संसदीय सुनवाई समिति के इस फैसले को सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दोनों विवादित नामों को सर्वसम्मति से खारिज किए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार ने अनुचित आचरण के आरोपों से घिरे व्यक्तियों को राजदूत पद के लिए सिफारिश किया था।

समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सांसद बोधनारायण श्रेष्ठ कर रहे हैं और समिति में इसी पार्टी का बहुमत है। इसके बावजूद विवादित नामों को सर्वसम्मति से खारिज किए जाने पर समिति के निष्पक्ष और स्वतंत्र निर्णय की प्रशंसा हो रही है।

यूएमएल के नेता योगेश भट्टराई ने भी इस फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा, “संसदीय सुनवाई समिति ने दूसरी बार इतिहास रचा है। सुनवाई समिति की प्रासंगिकता इसी तरह साबित होती है। खुशी हुई। बधाई।” बैठक में अन्य 10 देशों के लिए प्रस्तावित राजदूतों के नामों को संसदीय सुनवाई समिति ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।

मंजूरी पाने वाले प्रस्तावित राजदूतों में भारत के लिए डॉ. निश्चल राज पांडे, चीन के लिए डॉ. कल्याण राज शर्मा, अमेरिका के लिए चिरनजंग थापा, ब्रिटेन के लिए गौरव शमशेर जबरा, इजरायल के लिए सुरेश कुमार कर्ण, दक्षिण कोरिया के लिए डॉ. संगम श्रेष्ठ, स्पेन के लिए प्राप्ति शेरचन, श्रीलंका के लिए डॉ. मञ्चला झा, जर्मनी के लिए सरु जोशी और ओमान के लिए डॉ. पद्माक्षी राणा शामिल हैं।

लंबे समय तक राजदूत पद रिक्त रहने के बाद नेपाल सरकार ने गत 2 अक्टूबर को 13 देशों के लिए राजदूतों के नामों की सिफारिश की थी। हालांकि, संसदीय सुनवाई समिति की प्रक्रिया में दो प्रस्तावित राजदूतों के नाम खारिज हो गए।

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