हृदय रोगों के बढ़ते वैश्विक बोझ के बीच समय पर पहचान, जोखिम कारकों पर नियंत्रण और उचित उपचार की जरूरत लगातार बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मौत का प्रमुख कारण हैं। वर्ष 2022 में हृदय संबंधी रोगों से अनुमानित 19.8 मिलियन लोगों की मौत हुई, जो वैश्विक मौतों का करीब 32% है। इनमें 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। वर्ष 2026 में विश्व हृदय महासंघ की ‘डोंट मिस अ बीट’ (Don’t Miss a Beat) मुहिम हृदय रोगों के छिपे या नजरअंदाज किए जाने वाले संकेतों को पहचानने और समय पर कार्रवाई करने पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) मनाया जाता है।
दुनिया में मौतों का प्रमुख कारण हैं हृदय संबंधी रोग
हृदय संबंधी रोगों में कोरोनरी हृदय रोग, सेरेब्रोवास्कुलर रोग, रूमेटिक हृदय रोग और हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं। WHO के मुताबिक 2022 में हृदय संबंधी बीमारियों से हुई मौतों में 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। इन बीमारियों का असर केवल बुजुर्ग आबादी तक सीमित नहीं है। WHO के अनुसार 2021 में गैर-संचारी रोगों से 70 वर्ष से कम उम्र में हुई 18 मिलियन समय से पहले मौतों में कम से कम 38% मौतें हृदय संबंधी रोगों से जुड़ी थीं।
भारत में भी बढ़ रहा है गैर-संचारी रोगों का बोझ
भारत में हृदय संबंधी बीमारियां गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से जुड़े अध्ययनों में अस्वास्थ्यकर आहार, उच्च रक्तचाप, बढ़ी हुई रक्त शर्करा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और अधिक वजन जैसे जोखिम कारकों को देश में हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ से जोड़ा गया है। आईसीएमआर के अनुसार इन जोखिम कारकों पर प्रभावी नियंत्रण से बीमारी के बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना लक्षण के बढ़ाता है जोखिम
उच्च रक्तचाप हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है और कई लोगों में लंबे समय तक इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है और समय के साथ हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा हृदय विफलता जैसी स्थितियों का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए केवल लक्षण महसूस होने का इंतजार करने के बजाय नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल जैसे संकेतकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। WHO के अनुसार इन जोखिम कारकों की शुरुआती पहचान होने पर परामर्श और आवश्यक दवाओं के जरिए जोखिम का प्रबंधन शुरू किया जा सकता है।
खानपान का सीधा संबंध हृदय स्वास्थ्य से
हृदय को स्वस्थ रखने में खानपान की महत्वपूर्ण भूमिका है। WHO अस्वास्थ्यकर आहार को हृदय रोग और स्ट्रोक के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल करता है। भोजन में अत्यधिक नमक, अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त शर्करा का अधिक सेवन, जबकि फल और सब्जियों जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों का कम सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार, पर्याप्त फल और सब्जियां तथा नमक और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा पर नियंत्रण हृदय स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
शारीरिक गतिविधि की कमी भी बड़ा जोखिम
आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना और नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी हृदय स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकती है। विश्व हृदय महासंघ ने 2026 में ‘कीप द बीट’ चैलेंज के तहत सितंबर में रोजाना 20 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया है। इसमें चलना, साइकिल चलाना, खेलना, दौड़ना या नृत्य जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि व्यायाम की मात्रा और प्रकार व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप होना चाहिए।
तंबाकू से दूरी हृदय के लिए जरूरी
तंबाकू का सेवन हृदय संबंधी बीमारियों के प्रमुख परिवर्तनीय जोखिम कारकों में शामिल है। धूम्रपान और तंबाकू के अन्य रूप रक्त वाहिकाओं तथा हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। WHO के अनुसार तंबाकू सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर आहार और हानिकारक तरीके से शराब का सेवन हृदय रोग तथा स्ट्रोक के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसलिए तंबाकू से दूरी बनाना हृदय रोगों के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मोटापा, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को भी नजरअंदाज न करें
हृदय स्वास्थ्य केवल रक्तचाप तक सीमित नहीं है। बढ़ी हुई रक्त शर्करा, असामान्य रक्त लिपिड, अधिक वजन और मोटापा भी हृदय संबंधी जोखिम बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। WHO के अनुसार इन मेटाबोलिक जोखिम कारकों की पहचान प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर की जा सकती है और इनके प्रबंधन से हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा हृदय विफलता जैसी जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। आईसीएमआर से जुड़े अध्ययनों ने भी भारत में उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, अस्वास्थ्यकर आहार और अधिक वजन को महत्वपूर्ण जोखिम कारकों के रूप में रेखांकित किया है।
दिल का दौरा आने के संकेत पहचानना जरूरी
हृदय रोगों के संदर्भ में केवल रोकथाम ही नहीं, बल्कि चेतावनी संकेतों की पहचान भी महत्वपूर्ण है। सीने के बीच में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, मतली या उल्टी, चक्कर, ठंडा पसीना और असामान्य कमजोरी हार्ट अटैक के संभावित संकेत हो सकते हैं। लक्षण व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं। WHO के अनुसार महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज वाले लोगों में सांस फूलना, थकान, अपच जैसी परेशानी या पीठ और जबड़े में दर्द जैसे अपेक्षाकृत अलग लक्षण भी सामने आ सकते हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
महिलाओं और युवाओं में भी हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी
हृदय रोग को लंबे समय तक मुख्य रूप से उम्रदराज लोगों की समस्या के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन इसके जोखिम कारक कम उम्र में भी मौजूद हो सकते हैं। अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू, अधिक वजन, उच्च रक्तचाप और अन्य मेटाबोलिक जोखिम कारक कम उम्र में भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पारंपरिक सीने के दर्द से अलग रूप में भी सामने आ सकते हैं। इसलिए उम्र या लिंग के आधार पर हृदय संबंधी चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
वायु प्रदूषण भी हृदय के लिए चुनौती
हृदय स्वास्थ्य की चर्चा में पर्यावरणीय कारकों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। WHO वायु प्रदूषण को हृदय रोग और स्ट्रोक से जुड़े महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जोखिम कारकों में शामिल करता है। सूक्ष्म कणों सहित वायु प्रदूषक फेफड़ों के जरिए रक्तप्रवाह में पहुंच सकते हैं और हृदय तथा रक्त वाहिकाओं पर असर डाल सकते हैं। लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क को हृदय रोग और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।
नियमित जांच से जोखिम की समय पर पहचान
हृदय रोगों की रोकथाम में नियमित स्वास्थ्य जांच की अहम भूमिका है। रक्तचाप, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल, वजन और अन्य चिकित्सकीय संकेतकों की जांच से जोखिम वाले लोगों की पहचान की जा सकती है। WHO के अनुसार हृदय संबंधी रोगों का जल्द पता चलने पर परामर्श और आवश्यक दवाओं के माध्यम से जोखिम का प्रबंधन शुरू किया जा सकता है। खासकर ऐसे लोगों को नियमित चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए जिनमें उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन, तंबाकू सेवन या अन्य ज्ञात जोखिम कारक मौजूद हों।
रोकथाम में छोटे बदलावों की बड़ी भूमिका
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किसी एक दिन की गतिविधि पर्याप्त नहीं होती। रोजमर्रा की आदतों में लगातार किए गए बदलाव महत्वपूर्ण होते हैं। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तंबाकू से दूरी, शराब के हानिकारक सेवन से बचाव और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जोखिम कारकों का प्रबंधन हृदय स्वास्थ्य की दिशा में मददगार हो सकता है। विश्व हृदय महासंघ की 2026 की पहल भी रोजाना छोटे कदमों के जरिए हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर देती है।
इलाज तक समान पहुंच भी जरूरी
हृदय रोगों से निपटने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बचाव के साथ स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच भी महत्वपूर्ण है। विश्व हृदय महासंघ की 2026 की ‘डोंट मिस अ बीट’ मुहिम रोकथाम, लक्षणों की पहचान और उपचार तक पहुंच को व्यापक हृदय स्वास्थ्य प्रयासों का हिस्सा मानती है। WHO भी हृदय रोगों की शुरुआती पहचान और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर जोखिम प्रबंधन तथा आवश्यक उपचार की उपलब्धता पर जोर देता है। ऐसे में हृदय स्वास्थ्य को केवल विशेषज्ञ उपचार तक सीमित रखने के बजाय प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर जांच और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना जरूरी है।
विश्व हृदय दिवस का संदेश: धड़कन को नजरअंदाज न करें
विश्व हृदय दिवस 2026 पर विश्व हृदय महासंघ की ‘डोंट मिस अ बीट’ मुहिम लोगों को हृदय रोगों के संकेत पहचानने, हृदय की सुरक्षा के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूक कर रही है। 29 सितंबर का यह दिन केवल जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का अवसर है कि हृदय स्वास्थ्य के लिए रोजमर्रा की आदतों में सुधार, समय पर जांच और चेतावनी संकेत दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है।

















