सोचिए, एक्टर की फिल्में हिट हो रही हों, करियर रफ्तार पकड़ रहा हो... और फिर अचानक उसे बॉलीवुड छोड़कर दूसरे देश जाना पड़े, आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई थी चंकी पांडे के साथ यही कहानी हुई. 80 के दशक में हीरो बनकर छाए चंकी का करियर जब ढलान पर आया, तो उन्होंने बांग्लादेश का रुख किया और वहां ऐसा स्टारडम हासिल किया कि लोग उन्हें अपने चहेते सितारों में गिनने लगे. लेकिन असली ट्विस्ट उनकी वापसी के बाद आया. बॉलीवुड में लौटे तो कहानी बिल्कुल बदल चुकी थी,हीरो वाली चमक पीछे छूट गई थी, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ ऐसा बचाकर रखा था, जिसने आने वाले सालों में उनकी पहचान ही बदल दी. 26 सितंबर को जन्मदिन पर खोलते हैं चंकी पांडे की जिंदगी का वो दिलचस्प किस्सा, जहां एक खत्म होती पारी ने अचानक नया रंग पकड़ लिया.
शुरुआत ऐसी हुई कि लगा था लंबी चलेगी पारी
साल 1987. चंकी पांडे ने 'आग ही आग' से बॉलीवुड में कदम रखा और फिल्मी दुनिया को अपना चेहरा दिखाया. इसके बाद 'पाप की दुनिया' और 'तेजाब' जैसी फिल्मों ने उनके नाम को पहचान दिलानी शुरू कर दी. खास बात ये थी कि चंकी सिर्फ फिल्मों में नजर नहीं आ रहे थे, बल्कि उनके करियर में लगातार रफ्तार दिखाई दे रही थी. 80 के दशक के आखिर तक वह उन चेहरों में शामिल हो चुके थे, जिनसे दर्शकों को आगे काफी उम्मीदें थीं.
फिर आई 'तेजाब' और कहानी को एक और मोड़ मिला. फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के बीच भी चंकी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. ऐसा लग रहा था कि अब चंकी पांडे का नाम बॉलीवुड की अगली बड़ी लिस्ट में शामिल होने वाला है. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में सबसे बड़ा सवाल यही होता है, आज जो सितारा ऊपर जा रहा है, क्या वह कल भी वहीं रहेगा?
जब चमकने लगा था करियर, तभी बदल गया बॉलीवुड का खेल
90 के दशक में चंकी लगातार फिल्मों का हिस्सा बने. लेकिन धीरे-धीरे इंडस्ट्री का माहौल बदलने लगा. फिल्मों में काम करने का तरीका बदला और चंकी को पहले जैसे मौके मिलना कम होने लगे. यहां से उनके करियर में वो दौर शुरू हुआ, जिसके बारे में शायद उन्होंने खुद भी नहीं सोचा होगा. एक तरफ बॉलीवुड में उनका काम कम हो रहा था और दूसरी तरफ उनके सामने एक ऐसा रास्ता खुला, जो उन्हें भारत से बाहर ले जाने वाला था. चंकी ने वो रास्ता चुना और पहुंच गए बांग्लादेश. अब सवाल था कि क्या एक भारतीय अभिनेता दूसरे देश में जाकर अपनी जगह बना पाएगा? चंकी ने इस सवाल का जवाब अपने काम से दिया.
बॉलीवुड में काम कम हुआ तो बांग्लादेश में चमक उठा सितारा
बांग्लादेश पहुंचने के बाद चंकी पांडे ने वहां की फिल्मों में काम करना शुरू किया. यहां कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी. जिस अभिनेता का नाम हिंदी सिनेमा में धीरे-धीरे पीछे छूट रहा था, उसे बांग्लादेशी दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया. उन्होंने वहां कई फिल्मों में काम किया और देखते ही देखते उनकी अपनी पहचान बन गई. यानी भारत में जहां उनके करियर की रफ्तार कम हो रही थी, वहीं दूसरे देश में उनके लिए नए दरवाजे खुल रहे थे. उनका यह दौर इतना अहम रहा कि बांग्लादेश में उन्हें एक लोकप्रिय भारतीय अभिनेता के तौर पर पहचान मिली. लेकिन क्या चंकी हमेशा के लिए वहीं रहने वाले थे? बिल्कुल नहीं. कहानी में अभी एक और वापसी बाकी थी.

















