बुखार के बाद गले में इंफेक्शन, खांसी और खराश है, राहत पाने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय


सेहत/स्वाद 29 September 2026
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बुखार के बाद गले में इंफेक्शन, खांसी और खराश है, राहत पाने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

इन दिनों फैल रहे वायरल इंफेक्शन, स्वाइन फ्लू और मौसम के बदलाव के कारण लोगों को सर्दी, जुकाम और गले में दर्द या संक्रमण की समस्या काफी हो रही है। गले में कुछ चिपचिपा, अटका हुआ, गले में चुभन सी महसूस होती है या खाना खाने में तकलीफ होती है तो ये गले के इन्फेक्शन की निशानी हो सकती है। कई बार लोगों को गले में सूजन हो जाती है, खाना ऊपर की तरफ आने लगता है और लगातार खांसी की शिकायत रहती है। इसे ठीक करने के लिए आयुर्वेद में कुछ असरदार उपाय बताए गए हैं। आशा आयुर्वेद क्लीनिक की डॉक्टर चंचल शर्मा से जानते हैं गले को स्वस्थ कैसे रखें और खांसी को दूर करने के क्या उपाय हैं।

गले के इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण

गले में खराश और जलन

गले के पीछे वाले हिस्से में म्यूकस डिस्चार्ज

टॉन्सिल में सूजन और दर्द

आवाज का बैठना या भारी होना

बुखार और खांसी भी हो सकते हैं

गले में लगातार सूखापन

जबड़े और गर्दन में दर्द

सिरदर्द

केवल गले की जांच से ऐसी परेशानी का पूरा इलाज होना मुश्किल है। इसीलिए ऐसे थ्रोट इन्फेक्शन में नाक से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है।

गले का इन्फेक्शन के लिए आयुर्वेदिक औषधि

गले को आराम देने वाली जड़ी-बूटियां- चरक संहिता के सूत्र-स्थान (अध्याय 4) में आचार्य चरक ने उन दस बेहतरीन जड़ी-बूटियों का ज़िक्र किया है जो गले की जलन, दर्द और इन्फेक्शन को कम करती हैं और आवाज़ को साफ़ बनाती हैं।

"सारिवाक्षुमूलमधुकद्राक्षाविदारीकैटर्याहंसपादीसूरसाश्वदंष्ट्रा

इति दशेमानि कण्ठ्यानि भवन्ति" 

अर्थ है- सारिवा, ईख की जड़ , मुलेठी , मुनक्का , विदारीकंद, कैटर्य, हंसपदी, तुलसी और गोक्षुर – ये 10 औषधियां गले के लिए बहुत फायदेमंद हैं। अगर गले में दर्द या इन्फेक्शन हो तो मुलेठी और तुलसी का काढ़ा लिया जा सकता है। इसके सेवन से बहुत ज़्यादा आराम मिलता है।

गले की बीमारियों के कारण-  सुश्रुत संहिता (निदान स्थान, अध्याय 16) में गले की बीमारियों के शुरू होने के मुख्य कारणों के बारे में बताया गया है।

"प्रकुपितास्तु दोषाः कण्ठे कण्ठगतान् रोगान् प्रकुर्वते।"

अर्थ है- जब शरीर में वात, पित्त, और कफ दोष असंतुलित हो जाते हैं और गले में जमा हो जाते हैं, तो गले में कई तरह के संक्रमण, टॉन्सिलिटिस और सूजन जैसी बीमारियां पैदा होती हैं।

गले के रोगों के लिए सबसे सरल उपचार- अष्टांग हृदय और सुश्रुत संहिता में, 'गंडुषा' यानि कुल्ला करना गले के विकारों के लिए सबसे अच्छा उपाय माना जाता है।

"कफघ्नैः कण्ठरोगेषु कवलैः संविशोधयेत्।"

अर्थ है- कफ को खत्म करने वाले पदार्थों जैसे हल्दी, सेंधा नमक या त्रिफला वाले गर्म पानी से गरारे करने से गला प्रभावी ढंग से साफ हो जाता है और संक्रमण से मुक्त हो जाता है।

खांसी और खराश के लिए आयुर्वेदिक औषधि

हल्दी और नमक के गरारे- एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे करें।

मुलेठी का सेवन- आधा चम्मच मुलेठी पाउडर को शहद में मिलाकर धीरे-धीरे चाटें; इससे गले की सूजन में तुरंत आराम मिलता है।

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