प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली के यशोभूमि परिसर में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के 10वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन दूरसंचार, डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार में भारत की उल्लेखनीय प्रगति को प्रदर्शित करेगा, साथ ही सहयोग, निवेश और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा।
आईएमसी 2026 का विषय "सीमाओं के बिना विस्तार" है, जो डिजिटल नवाचार, अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। कल से शुरू हुआ यह चार दिवसीय कार्यक्रम दूरसंचार विभाग और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
यह आयोजन नवाचार और अगली पीढ़ी के डिजिटल अवसंरचना, प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक विकास, समावेशी डिजिटल पहुंच और सुरक्षित एवं लचीले डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर केंद्रित होगा। आईएमसी 2026 ने वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और नवोन्मेषकों को डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में उभरते अवसरों का पता लगाने के लिए एक साथ लाया है।
2026 संस्करण में नौ स्थापित प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, जिनमें 5G और 6G, अगली पीढ़ी के AI नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, गैर-स्थलीय नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार, उद्यम परिवर्तन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और ESG, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शामिल हैं। यह आयोजन अपने क्षेत्रीय फोकस को चार नए क्षेत्रों - स्मार्ट मोबिलिटी, स्टेडियम अनुभव, औद्योगिक रोबोटिक्स और परिवहन प्रौद्योगिकी - तक विस्तारित करेगा।
इस आयोजन में 100 से अधिक देशों के 1.5 लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें 500 से अधिक साझेदार और प्रदर्शक, 600 स्टार्टअप और 900 विचारकों की भागीदारी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 से पहले नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) के बोर्ड सदस्यों के साथ भी बातचीत की। जीएसएमए एक वैश्विक संगठन है जो मोबाइल इकोसिस्टम को एकीकृत करता है और मोबाइल ऑपरेटरों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है जो मोबाइल इकोसिस्टम और उससे जुड़े उद्योगों में काम करते हैं।
इस संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी को समावेशी और सतत विकास का साधन बनना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं को किफायती और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने विकासशील देशों के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में क्षमता पर भी प्रकाश डाला। डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती चुनौती का समाधान करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि इस समस्या के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों की आवश्यकता है। उन्होंने संभावित धोखाधड़ी वाले कॉलों के बारे में लोगों को आगाह करने के लिए उपयोगकर्ताओं के लिए निरंतर जागरूकता संदेशों का सुझाव दिया।
















